Friday, 26 September 2014

हाइकु

१.
टूटती डाल
वृक्षों से अलग हो
काँटा सी हुई
२.
एक ही वृक्ष
समेटे है अनेकों
शाख औ पात
३.
गर्मी जो आई
पानी में खेलकर
मस्ती है छाई
४.
रात अंधेरी
भूत से खड़े पेड़ 
डरूं घनेरी 
५.
गुच्छा फूलों का 
दे रहा सीख हमें 
मिल के रहो 

सविता अग्रवाल "सवि" 

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